04 January, 2010

EIR & BNR की संयुक्त कोलियरी के रूप में बोकारो का जन्म हुआ

नमस्कार
           बेरमो से जन्म का रिश्ता होने के कारण कुछ जानकारियां मैं भी आप सभी के साथ बांटना चाहता हूं। संभव है यह सब आपको पहले ही से पता हो। फिर भी व्यक्त करने से स्वयं को रोक नहीं पा रहा हूं। बेरमोजैसा कि सभी जानते हैंऊर्जा के सबसे प्रमुख स्रोत 'कोयलेके भंडार के कारण प्रसिद्ध है। पर शहर/गांव तथा खदान का नाम भिन्न होने के कारण बेरमो को वह प्रसिद्धि न मिल पायी जिसका यह कोयलांचल हकदार है। अन्यथा देश की सबसे पुरानी खदानों में से एक "बोकारो" खदान इतनी उपेक्षित न होती। जो गरिमा रानीगंज,झरिया आदि कोयलांचलों को प्राप्त है वह दुर्भाग्य से बेरमो को नहीं। पूरे भारतवर्ष के माध्यमिक  विद्यालयीन पाठ्यक्रम में 'कोयला देश में कहां पाया जाता हैके उत्तर में बोकारो का नाम रानीगंज के साथ ही अग्रक्रम में लिया जाताहै। आप सभी को भी अवश्य याद आया होगाजो हमने बचपन में पढा था। बहुत कम लोग जानते हैंकि ये बोकारो ही अपना बेरमो कोयलांचल है। दरअसल तत्कालीन ब्रिटिश शासन काल में EAST INDIA RAILWAY तथा BENGAL NAGPUR RAILWAY की याने EIR & BNR की संयुक्त कोलियरी के रूप में बोकारो का जन्म हुआ था। जैसा कि नाम से ही विदित होता है यह अंगरेजों द्वारा दिया अंग्रेजी नाम है। उस समय बोकारो इस्पात नगर अस्तित्व में नहीं था। माराफरी गांव में काफी अरसे के बाद इस्पात उद्योग प्रारंभ हुआ। जिसका नाम भी (दुर्भाग्यवश) बोकारो रखा गया। इससे पूर्व टाटा कीWEST BOKARO तथा DVC की BOKARO ताप विद्युत इकाई अस्तित्व में आ गई थी। पर विडंबना ये कि ORIGINAL (मूल) बोकारो को भूल आज सभी इस्पात नगर बोकारो को जानते हैंजो आज झारखंड राज्य का एक महत्वपूर्ण जिला भी है।
          अगर किसी अन्य महानुभाव को और जानकारी हो तो उनका स्वागत हैसाथ ही मेरी जानकारी में कोई त्रुटि रह गई हो तो कृपया अवश्य सुधार दें। मुझे खुशी होगी। समय समय पर और भी जानकारी देने का प्रयास करूंगा।
धन्‍यवाद !
दीपक ग. राइरकर
वेस्‍टर्न कोलफ‍िल्‍ड्स लिमिटेड
चन्‍द्रपुर (महाराष्‍ट्र)

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